संपत्ति विधि

राजस्थान में नामांतरण (दाखिल-खारिज) कैसे कराएं: Apna Khata की पूरी प्रक्रिया

नामांतरण (Mutation) — जिसे राजस्थान में इंतकाल या दाखिल-खारिज भी कहते हैं — किसी संपत्ति के स्वामित्व/कब्ज़े में परिवर्तन को राजस्व अभिलेखों (जमाबंदी) में अद्यतन करने की प्रक्रिया है। यह परिवर्तन विक्रय, दान, उत्तराधिकार (मृत्यु), वसीयत, बँटवारे या न्यायालयी डिक्री के कारण हो सकता है। नामांतरण के पश्चात् नए स्वामी का नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज होता है, जिससे भूमि-कर एवं भविष्य के लेन-देन सुगम होते हैं।

यह स्मरण रखना अत्यंत आवश्यक है कि नामांतरण से स्वामित्व (टाइटल) सिद्ध नहीं होता। उच्चतम न्यायालय ने बलवंत सिंह बनाम दौलत सिंह (1997) सहित अनेक निर्णयों में स्पष्ट किया है कि राजस्व प्रविष्टियाँ केवल राजकोषीय उद्देश्य हेतु हैं; स्वामित्व का अंतिम निर्धारण सक्षम सिविल न्यायालय ही करता है। अतः नामांतरण होने मात्र से किसी विवादित संपत्ति का विवाद समाप्त नहीं होता।

प्रक्रिया: नामांतरण का आवेदन संबंधित तहसीलदार/पटवारी हलका के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। पटवारी संबंधित अभिलेख तैयार करता है; तहसीलदार प्रभावित पक्षों को सूचना/उद्घोषणा जारी करता है। यदि कोई आपत्ति नहीं आती तो विवादरहित नामांतरण दर्ज कर दिया जाता है; आपत्ति आने पर मामला विवादित नामांतरण बनकर सुनवाई हेतु जाता है।

राजस्थान सरकार के Apna Khata / e-Dharti पोर्टल (apnakhata.raj.nic.in) पर जमाबंदी एवं नामांतरण की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकती है। अनेक प्रकार के नामांतरण हेतु ऑनलाइन आवेदन एवं ट्रैकिंग की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है।

सामान्य आवश्यक दस्तावेज़: विक्रय के मामले में पंजीकृत विक्रय-विलेख; उत्तराधिकार के मामले में मृत्यु प्रमाण-पत्र एवं वारिसान/उत्तराधिकार प्रमाण; वसीयत के मामले में वसीयत (तथा यथास्थिति प्रोबेट); बँटवारे के मामले में पंजीकृत बँटवारा विलेख या डिक्री — साथ में पूर्व जमाबंदी की प्रति एवं आवेदक का पहचान-पत्र।

विवादरहित नामांतरण सामान्यतः कुछ सप्ताहों में हो जाता है; विवादित मामलों में अधिक समय लगता है। तहसीलदार के नामांतरण आदेश से असंतुष्ट पक्ष क्रमशः उपखंड अधिकारी → कलेक्टर → राजस्व मंडल, अजमेर तक अपील कर सकता है। यदि स्वामित्व ही विवादित हो, तो उचित उपाय सिविल न्यायालय में टाइटल का वाद है, न कि केवल नामांतरण की कार्यवाही।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी हेतु है और इसे विधिक परामर्श नहीं माना जाए। अपने विशिष्ट मामले में मार्गदर्शन हेतु किसी योग्य अधिवक्ता से परामर्श करें।
शुभम ओझा एवं एसोसिएट्स
अधिवक्ता, राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर  ·  दूरभाष: +91 70230 51275  ·  WhatsApp

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