आपराधिक विधि

FIR कैसे रद्द होती है — BNSS धारा 528 के तहत Quashing Petition

अगर किसी के खिलाफ FIR दर्ज हो जाए — चाहे सच्ची हो या झूठी — तो सबसे पहला सवाल यही आता है: क्या इसे रद्द कराया जा सकता है? जवाब है: हाँ, कुछ परिस्थितियों में। FIR Quashing वह प्रक्रिया है जिसमें High Court अपनी inherent power का इस्तेमाल करके एक दर्ज FIR या पूरी आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरह रद्द कर देती है। BNSS 2023 की धारा 528 (पुराने CrPC की धारा 482 का नया रूप) यही power देती है। Rajasthan HC को यह power प्राप्त है और वह इसका प्रयोग बहुत carefully करती है — क्योंकि यह एक extraordinary remedy है, routine नहीं। एक बात शुरू में ही समझ लें: quashing होती है FIR के face value पर — यानी petition के समय police की final report का इंतज़ार नहीं होता, न ही trial का।

Rajasthan HC में quashing के जो grounds काम करते हैं वो मुख्यतः Supreme Court के दो landmark cases से आते हैं — R. P. Kapur v. State of Punjab (1960) और State of Haryana v. Bhajan Lal (1992)। सबसे मज़बूत ground यह है कि FIR में कोई cognizable offence face value पर भी नहीं बनता — यानी अगर FIR में लिखी गई सारी बातें सच मान भी लें, तो भी कानूनी अपराध नहीं बनता। दूसरा ground जो Jodhpur में बहुत frequently आता है: किसी civil या property dispute को criminal रंग दे दिया गया हो — पैसे का लेन-देन हो, ज़मीन का झगड़ा हो, business में मतभेद हो, और FIR दबाव बनाने के लिए ठोक दी गई हो। तीसरा ground जो courts बहुत seriously लेते हैं: दोनों parties के बीच genuine settlement हो गई हो। यह खासतौर पर compoundable offences में काम करता है।

अब एक बात absolutely clear कर दें — कुछ cases में quashing नहीं मिलती, चाहे कितना भी ज़ोर लगाएं। Murder, rape, POCSO, NDPS, corruption जैसे heinous offences में HC quashing petition dismiss कर देती है। Supreme Court ने Narinder Singh v. State of Punjab (2014) में साफ कहा — serious और heinous offences में settlement का ground नहीं चलता, चाहे दोनों parties राज़ी हों। इन cases में quashing की जगह bail application पर focus करना कहीं ज़्यादा practical है। BNSS §482 (sessions court bail) और §483 (HC bail) — ये रास्ते उन cases में ज़्यादा काम के हैं जहाँ quashing का scope नहीं है।

Quashing petition High Court की criminal side में file होती है। इसके साथ सबसे ज़रूरी relief माँगी जाती है — Interim Stay on Arrest। यह petition pending रहने तक कोई गिरफ्तारी नहीं होती। यह practically बहुत valuable होता है। Rajasthan HC में generally petition file होते ही अगली या उसके बाद वाली date पर notice issue होती है और interim protection पर सुनवाई होती है। Timeline के बारे में honestly बताएं: final quashing में 6 महीने से 2 साल तक कुछ भी हो सकता है — court का workload और opposing party का cooperation बहुत कुछ तय करता है। पर interim protection आमतौर पर जल्दी मिल जाती है — यही कारण है कि quashing petition को लोग जल्दी file करते हैं।

Documents की बात करें तो quashing petition के लिए कम से कम ये चाहिए: FIR की certified copy (BNSS §35 के तहत complainant और accused दोनों को मुफ्त मिलती है), chargesheet अगर file हो चुकी है, settlement deed या agreement अगर ground वही है, और जो भी documents यह दिखाएं कि FIR दुर्भावनापूर्ण (malicious) है या civil dispute को criminal बनाया गया है। एक practical बात जो लोग अक्सर miss करते हैं — quashing petition file करने से पहले anticipatory bail का option भी साथ में explore करें। दोनों simultaneously चल सकती हैं। अगर petition में time लगे, तो anticipatory bail उस दौरान protect करती है। यह combined strategy Rajasthan HC में काफी common है और समझदारी भरी भी।

यह लेख केवल सामान्य जानकारी हेतु है और इसे विधिक परामर्श नहीं माना जाए। अपने विशिष्ट मामले में मार्गदर्शन हेतु किसी योग्य अधिवक्ता से परामर्श करें।
शुभम ओझा एवं एसोसिएट्स
अधिवक्ता, राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर  ·  दूरभाष: +91 70230 51275  ·  WhatsApp

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