गिरफ्तारी का डर किसी भी परिवार को तोड़ देता है। पर BNSS 2023 ने गिरफ्तार व्यक्ति को कई स्पष्ट अधिकार दिए हैं जो police भी ignore नहीं कर सकती। इन्हें जानना ज़रूरी है — not just accused के लिए, उनके परिवार के लिए भी। BNSS §35 के तहत FIR की प्रति निःशुल्क पाने का अधिकार, §37 के तहत गिरफ्तारी के कारण जानने का अधिकार — ये अधिकार लागू हैं। Jodhpur में court में देखता हूँ कि इन बुनियादी अधिकारों की जानकारी न होने पर परिवार घबराहट में ऐसे कदम उठा लेते हैं जो बाद में मामला कमज़ोर कर देते हैं।
24 घंटे का नियम और वकील का अधिकार — BNSS §50 के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के अंदर Magistrate के सामने पेश करना अनिवार्य है। यह absolute rule है। Article 22(1) के तहत अपनी पसंद के वकील से परामर्श का अधिकार है। Supreme Court ने D.K. Basu v. State of West Bengal में clearly कहा — वकील से मिलने देने से इनकार करना fundamental right का उल्लंघन है। Statement देने से पहले वकील ज़रूरी है — पुलिस के सामने "off the record" कुछ नहीं होता।
हर FIR में गिरफ्तारी ज़रूरी नहीं। Arnesh Kumar v. State of Bihar (2014) में Supreme Court ने कहा — 7 साल से कम सज़ा वाले अपराधों में arrest तभी हो जब genuinely ज़रूरी हो। Rajasthan HC भी आमतौर पर इस principle को apply करती है। BNSS §35(2) में police को arrest की necessity justify करनी होती है — यह पुरानी CrPC की तुलना में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। अगर arrest unnecessary लगे, anticipatory bail (§482) या HC में writ लगाई जा सकती है।
Self-incrimination और medical examination — Article 20(3) बिल्कुल स्पष्ट है: कोई भी व्यक्ति खुद के विरुद्ध गवाह बनने के लिए बाध्य नहीं। BNSS §52 के तहत medical examination का अधिकार है — खासकर अगर custody में चोट लगी हो। Blank papers पर sign नहीं करें। जो statement देंगे वो record में जाती है — बाद में modify नहीं होती। परिवार को immediately किसी अधिवक्ता को inform करना चाहिए।
परिवार के लिए practical steps: सबसे पहले एक वकील से संपर्क करें। FIR copy मांगें, थाना और police officer का नाम note करें, arrest time record करें — ये छोटी-छोटी बातें बाद में बड़ा फर्क डालती हैं। अगर police station visit किया तो चाहे permission मिले या न मिले, written में अनुरोध करें — यह record बनाता है। Bailable offences में थाने पर ही bail का अधिकार है। मत भूलिए — 24 घंटे में Magistrate के सामने पेशी नहीं हुई तो तुरंत writ habeas corpus का option है।